षड्दर्शन: सांख्य (पुरुष-प्रकृति, 25 तत्व), योग (चित्तवृत्ति निरोध, अष्टांग), न्याय (तर्क-प्रमाण), वैशेषिक (परमाणु सिद्धांत), मीमांसा (वैदिक कर्मकांड), वेदांत (ब्रह्म-आत्मा, उपनिषद)। तीन जोड़ियां: सांख्य-योग, न्याय-वैशेषिक, मीमांसा-वेदांत।
- 1मूल ग्रंथ — सांख्यकारिका (ईश्वरकृष्ण)
- 2सार — सृष्टि दो मूल तत्वों से बनी है: पुरुष (चेतना) और प्रकृति (जड़ पदार्थ)। प्रकृति के तीन गुण — सत्व, रजस्, तमस् — से सृष्टि विकसित होती है। 25 तत्वों का सिद्धांत। मूल सांख्य में ईश्वर की आवश्यकता नहीं मानी गई (निरीश्वर)।
- 3मूल ग्रंथ — योगसूत्र
- 4सार — 'योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः' (1.2) — चित्त वृत्तियों का निरोध ही योग है। अष्टांग योग मार्ग। सांख्य + ईश्वर (सेश्वर सांख्य)। समाधि द्वारा कैवल्य (मोक्ष)।
- 5मूल ग्रंथ — न्यायसूत्र
- 6सार — तर्क और प्रमाण आधारित दर्शन। 16 पदार्थों (categories) का सिद्धांत। चार प्रमाण — प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द। सत्य ज्ञान से दुःख निवृत्ति।
- 7मूल ग्रंथ — वैशेषिकसूत्र
- 8सार — परमाणु सिद्धांत (Atomic Theory)। सृष्टि परमाणुओं से बनी है। 6 पदार्थ (द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय) + 7वां अभाव। भौतिक जगत का विश्लेषण।
- 9मूल ग्रंथ — मीमांसासूत्र
- 10सार — वैदिक कर्मकांड और यज्ञों का दार्शनिक विश्लेषण। धर्म = वेद विहित कर्म। वेद अपौरुषेय (ईश्वररचित नहीं, नित्य) हैं। कर्मफल पर बल।
- 11मूल ग्रंथ — ब्रह्मसूत्र
- 12सार — उपनिषदों का दार्शनिक विवेचन। ब्रह्म ही परम सत्य। आत्मा-ब्रह्म संबंध। तीन प्रमुख शाखाएं: अद्वैत (शंकर), विशिष्टाद्वैत (रामानुज), द्वैत (मध्व)। सबसे प्रभावशाली दर्शन।
- 13सांख्य + योग (सृष्टि + साधना)
- 14न्याय + वैशेषिक (तर्क + भौतिकी)
- 15मीमांसा + वेदांत (कर्मकांड + ज्ञानकांड)