षट्तिला = तिल के 6 प्रयोग: (1) तिल उबटन (स्नान पूर्व), (2) तिल स्नान (काले तिल जल में), (3) तिल तर्पण (पितरों को), (4) तिल हवन (अग्नि में), (5) तिल दान (ब्राह्मण-दरिद्र को), (6) तिल भक्षण (लड्डू-खिचड़ी खाना)।
- 1तिल का उबटन (तिलोद्वर्तन): स्नान से पूर्व पिसे हुए काले तिल, जौ और गोमूत्र (या गोधूलि/मिट्टी) का शरीर पर मर्दन (लेप) करना।
- 2तिल-स्नान: जल में काले तिल डालकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना।
- 3तिल-तर्पण: स्नान के पश्चात् दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को तिल मिश्रित जल (अंजलि) अर्पित करना।
- 4तिल-हवन: यज्ञ या अग्नि में 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या सूर्य मन्त्र से तिल की आहुति देना।
- 5तिल-दान: योग्य ब्राह्मणों और दरिद्रों को तिल और गुड़ का दान करना।
- 6तिल-भक्षण: तिल और गुड़ से निर्मित सात्विक पदार्थों (लड्डू, खिचड़ी) का भगवान को भोग लगाकर प्रसाद रूप में सेवन करना।