वास्तु के अनुसार शौचालय किस दिशा में होना चाहिए?
की चेकलिस्ट
शौचालय उत्तर-पश्चिम (वायव्य), दक्षिण या पश्चिम में बनाएँ। ईशान कोण, अग्नि कोण और घर के मध्य में कभी नहीं। पूजा घर के बगल/ऊपर/नीचे भी वर्जित। दरवाज़ा सदैव बंद रखें।
- 1उत्तर-पश्चिम (वायव्य कोण) — शौचालय के लिए सर्वोत्तम दिशा।
- 2दक्षिण दिशा — दूसरा उत्तम विकल्प।
- 3पश्चिम दिशा — स्वीकार्य विकल्प।
- 4ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — गंभीर वास्तु दोष। यह देव दिशा है, यहाँ शौचालय कभी नहीं बनाना चाहिए।
- 5दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण) — अग्नि तत्व का स्थान।
- 6ब्रह्मस्थान (घर का मध्य) — कभी नहीं।
- 7पूजा घर के बगल/ऊपर/नीचे — गंभीर दोष।
- 8किचन के बगल — अग्नि-जल दोष।
- 9शौचालय का दरवाज़ा सदैव बंद रखें।
- 10शौचालय में बैठने का मुख उत्तर या दक्षिण की ओर हो।
- 11शौचालय में रोशनी और वायु संचार पर्याप्त हो।
- 12शौचालय से पानी का बहाव उत्तर या पूर्व की ओर हो।
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