शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा (मस्तक=ईशान, कंठ=नीलकंठ आदि)। नकारात्मक ऊर्जा, तांत्रिक प्रयोग, शत्रु, ग्रह दोष, भय से सुरक्षा। प्रतिदिन प्रातः 1 पाठ। यात्रा/संकट में विशेष।
- 1शारीरिक: मस्तक से पैर तक — प्रत्येक अंग की रक्षा हेतु शिव के भिन्न-भिन्न नामों का आवाहन। शिर = ईशान, ललाट = त्र्यंबक, नेत्र = त्रिनेत्र, कंठ = नीलकंठ आदि।
- 2आध्यात्मिक: नकारात्मक ऊर्जा, बुरी दृष्टि, तांत्रिक प्रयोग से रक्षा।
- 3मानसिक: भय, चिंता, अवसाद से मुक्ति।
- 4ग्रह दोष: ग्रहों के अशुभ प्रभाव से रक्षा।
- 5शत्रु बाधा: शत्रुओं के षड्यंत्र से सुरक्षा।
- 6प्रतिदिन प्रातः स्नान बाद, शिव समक्ष।
- 7एक बार पाठ (5-7 मिनट)।
- 8सोमवार/शिवरात्रि विशेष प्रभावी।
- 9यात्रा/संकट काल में पाठ — विशेष रक्षा।