हां, महिलाएं शिव मंत्र का पूर्ण जप कर सकती हैं। 'ॐ नमः शिवाय', महामृत्युंजय मंत्र आदि सभी के लिए सुलभ हैं। माता पार्वती स्वयं शिव की परम साधिका हैं। कुछ परंपराओं में रजस्वला काल में शिवलिंग स्पर्श से परहेज की सलाह है, परंतु मानसिक जप सदा किया जा सकता है।
- 1शिव पुराण में भगवान शिव स्वयं कहते हैं कि उनकी भक्ति में किसी प्रकार का लिंग-भेद नहीं है।
- 2माता पार्वती स्वयं शिव की परम भक्त और साधिका हैं — यह सबसे बड़ा प्रमाण है।
- 3धर्मग्रंथों में 'साधक-साधिका' दोनों शब्दों का प्रयोग हुआ है, जो यह सिद्ध करता है कि पुरुष और स्त्री दोनों को साधना का समान अधिकार है।
- 4रजस्वला (मासिक धर्म) काल में कुछ परंपराओं में शिवलिंग स्पर्श और मंदिर जाने से परहेज की सलाह दी जाती है, परंतु मानसिक जप इस अवस्था में भी किया जा सकता है।
- 5कुछ तांत्रिक मंत्रों के लिए गुरु-दीक्षा आवश्यक है — यह नियम पुरुष और स्त्री दोनों पर समान रूप से लागू होता है।
- 6महिलाओं को भी उन्हीं शुद्धता के नियमों का पालन करना चाहिए जो पुरुषों के लिए हैं — स्नान, शुद्ध वस्त्र, सात्विक आहार।