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चेकलिस्ट

शिवलिंग की जलाधारी का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

की चेकलिस्ट

जलाधारी का मुख सदैव उत्तर दिशा में (शिव पुराण, स्कन्द पुराण, वास्तु शास्त्र — तीनों एकमत)। वैकल्पिक: पूर्व दिशा। दक्षिण और पश्चिम सर्वथा वर्जित। उत्तर = कुबेर की दिशा, समृद्धि प्रवाह, सकारात्मक ऊर्जा। घर और मंदिर में नियम समान। जलाधारी कभी न लांघें।

  1. 1उत्तर दिशा कुबेर (धन के देवता) की दिशा है — समृद्धि का प्रवाह।
  2. 2उत्तर दिशा ध्रुव तारे की दिशा है — स्थिरता और शाश्वतता का प्रतीक।
  3. 3शिवलिंग की जलाधारी में अशोक सुंदरी, नर्मदा और कुबेर देवता का वास माना जाता है।
  4. 4उत्तर दिशा से ऊर्जा का सकारात्मक प्रवाह होता है।
  5. 5दक्षिण — पितरों की दिशा, जलाधारी का मुख दक्षिण में कभी न रखें।
  6. 6पश्चिम — अशुभ माना गया है।
  7. 7जलाधारी का मुख (जहां से जल बहता है) = उत्तर।
  8. 8भक्त का मुख = पूर्व या उत्तर।
  9. 9शिवलिंग का पिछला भाग = दक्षिण।
  10. 10जलाधारी को कभी न लांघें।
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