शिव पुराण में अक्षत (साबुत चावल) शिवलिंग पर चढ़ाने का विधान है। टूटे चावल सर्वथा वर्जित (शिव पुराण)। रुद्राभिषेक में 108 दाने का विधान। चावल पूर्णता, अन्न समृद्धि और सात्विकता का प्रतीक। श्वेत, साबुत, बिना कुमकुम/हल्दी के सादे अक्षत ही चढ़ाएं।
- 1चावल अन्न का प्रतीक है — अन्नदान सर्वश्रेष्ठ दान है।
- 2अखंडित चावल पूर्णता, समृद्धि और अखंड सौभाग्य का प्रतीक।
- 3चावल की श्वेतता शिव के निर्मल, सात्विक स्वरूप से मेल खाती है।
- 4अन्न की कमी नहीं होती।
- 5जीवन में पूर्णता और समृद्धि आती है।
- 6शिवलिंग पर अक्षत चढ़ाने से शनि दोष शांत होते हैं (ज्योतिषीय मान्यता)।
- 7केवल श्वेत, साबुत, स्वच्छ चावल ही प्रयोग करें।
- 8शिवलिंग पर रंगीन (कुमकुम/हल्दी लगे) अक्षत न चढ़ाएं।
- 9अभिषेक के बाद, चंदन तिलक लगाने के बाद अक्षत अर्पित करें।