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शिवलिंग पर शहद चढ़ाने की विधि और उसका फल क्या है?

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शहद पंचामृत अभिषेक का प्रमुख अंग। विधि: पहले जल से स्नान → शहद की धारा → 'ॐ नमः शिवाय' जप → पुनः जल अभिषेक। फल: दरिद्रता नाश, रोग निवारण, वाणी में मधुरता, ग्रह दोष शांति, मानसिक शांति। शुद्ध प्राकृतिक शहद ही प्रयोग करें। शिवलिंग का चढ़ावा ग्रहण न करें।

  1. 1पहले शुद्ध जल या गंगाजल से शिवलिंग को स्नान कराएं।
  2. 2फिर क्रमशः कच्चा दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें।
  3. 3शहद चढ़ाते समय 'ॐ नमः शिवाय' या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।
  4. 4अंत में पुनः शुद्ध जल से शिवलिंग को धोएं।
  5. 5शुद्ध, बिना मिलावट का शहद लें।
  6. 6शिवलिंग को पहले जल से स्नान कराएं।
  7. 7फिर धीरे-धीरे शहद की धारा शिवलिंग पर अर्पित करें।
  8. 8'ॐ नमः शिवाय' का 108 बार जप करें।
  9. 9अंत में जल से पुनः अभिषेक करें।
  10. 10शुद्ध, प्राकृतिक शहद ही प्रयोग करें।
  11. 11शहद को सीधे शिवलिंग पर अर्पित करें, शंख से नहीं।
  12. 12शिवलिंग पर चढ़ा शहद प्रसाद के रूप में ग्रहण न करें — शिवलिंग पर चढ़ी सामग्री ग्रहण करने का निषेध है (शिव पुराण)।
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