श्राद्ध में कौवे को ग्रास क्यों देते हैं?
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कौवा = पितरों का दूत (गरुड़ पुराण)। कौवे से पितर भोजन ग्रहण करते हैं। पंचबलि में कौवा = पितर। कौवा खाए = पितर तृप्त, न खाए = अतृप्त। भोजन सबसे पहले कौवे के लिए निकालें।
- 1कौवा = पितरों का दूत — गरुड़ पुराण के अनुसार कौवा यमराज/पितरों का संदेशवाहक है। कौवे के माध्यम से पितर भोजन ग्रहण करते हैं।
- 2पंचबलि — श्राद्ध में पांच प्राणियों को भोजन देना अनिवार्य:
- 3पितर तृप्ति का संकेत — कौवा ग्रास खाए = पितर तृप्त/प्रसन्न। न खाए = पितर अतृप्त।
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