श्राद्ध कर्म करते समय किस दिशा में बैठें?
की चेकलिस्ट
दक्षिण दिशा (यम/पितर दिशा) में मुख। जनेऊ उल्टा (अपसव्य)। कुश आसन, बायाँ घुटना मोड़ें। पिंड/जल दक्षिण में। देव पूजा = उत्तर/पूर्व, पितर = दक्षिण।
- 1दक्षिण = यम दिशा/पितर दिशा — यमराज और पितृलोक दक्षिण में माने गए हैं।
- 2तर्पण/पिंडदान में जल/पिंड दक्षिण दिशा में अर्पित करते हैं।
- 3जनेऊ उल्टा (अपसव्य) = बाएं कंधे पर — पितर कर्म विशेष।
- 4कुश (दर्भ) आसन पर बैठें।
- 5बायाँ घुटना मोड़कर बैठें (पितृतीर्थ मुद्रा)।
- 6दक्षिण दिशा में पिंड रखें।
- 7तर्पण का जल अंगूठा+तर्जनी (पितृतीर्थ) से गिराएँ।
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श्राद्ध विधि
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