श्राद्ध की तिथि भूल जाएं तो क्या करें?
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सर्वपितृ अमावस्या (पितृ पक्ष अंतिम दिन) को श्राद्ध करें — सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के लिए। पिता=अष्टमी, माता=नवमी, अकाल मृत्यु=चतुर्दशी। तिल-जल तर्पण + पिंडदान + ब्राह्मण भोजन।
- 1जिन पितरों की मृत्यु तिथि याद नहीं या भूल गए हों — उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या (आश्विन कृष्ण अमावस्या) को करें।
- 2इस दिन सभी पितरों (ज्ञात-अज्ञात) का श्राद्ध एक साथ किया जा सकता है।
- 3इसे 'पितृ विसर्जनी अमावस्या' भी कहते हैं — इस दिन पितर वापस पितृलोक जाते हैं।
- 4पिता का श्राद्ध = अष्टमी तिथि (पितृ पक्ष)।
- 5माता का श्राद्ध = नवमी तिथि।
- 6अकाल मृत्यु (दुर्घटना/आत्महत्या) = चतुर्दशी तिथि।
- 7अविवाहित = पंचमी तिथि।
- 8सन्यासी/विधवा = द्वादशी तिथि।
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श्राद्ध विधि
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