श्रीं बीज मंत्र का अर्थ क्या है?
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श्रीं = महालक्ष्मी का बीज। श् (लक्ष्मी) + र् (धन-ऐश्वर्य) + ई (इच्छाशक्ति) + अनुस्वार (दुःख-निवारण)। लक्ष्मी तंत्र: 'श्री' सर्वशक्ति हैं। तीन स्तर: भौतिक (धन-समृद्धि), सौभाग्य, आध्यात्मिक (मोक्ष)। शुक्रवार-पूर्णिमा को जप विशेष फलदायी।
- 1श् = महालक्ष्मी का वाचक वर्ण
- 2र् = धन और ऐश्वर्य का बोधक
- 3ई = इच्छा-शक्ति और तृप्ति
- 4अनुस्वार (ं) = दुःख-निवारण और आनंद-प्रदायिनी शक्ति
- 5'श्रयते' (जिसका आश्रय लिया जाता है) — लक्ष्मी सभी के आश्रय की देवी
- 6'श्रीयते' (जो सुनी जाती है, स्तुत होती है)
- 7'श्री' लक्ष्मी हैं, वे सर्वशक्ति हैं, और 'श्रीं' उनका बीज है।
- 8लक्ष्मी सूक्त के साथ: 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः'
- 9एकल जप: 'ॐ श्रीं नमः' या केवल 'श्रीं'
- 10शुक्रवार, दीपावली, और पूर्णिमा को जप विशेष फलदायी
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बीज मंत्र
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