सूतक के दौरान पूजा कर सकते हैं या नहीं
की चेकलिस्ट
मूर्ति पूजा/मंदिर/हवन = वर्जित। मानसिक जप/भजन = सदैव अनुमत। गीता श्रवण = स्वीकार्य। घर में: बिना सूतक वाला सदस्य पूजा करे। सार: शरीर से पूजा वर्जित, मन से भक्ति कभी वर्जित नहीं।
- 1मानसिक जप — मन में ईश्वर नाम जप, भजन — सदैव अनुमत। भगवान का नाम कभी वर्जित नहीं।
- 2गीता/रामायण श्रवण — सुनना स्वीकार्य (छूना नहीं — कुछ परंपरा)।
- 3शालिग्राम सेवा — कुछ वैष्णव परंपराओं में शालिग्राम पूजा सूतक में भी जारी रखी जाती है।
- 4एकादशी व्रत — कुछ परंपराओं में सूतक में भी एकादशी व्रत मान्य।
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