का सरल उत्तर
मूर्ति पूजा/मंदिर/हवन = वर्जित। मानसिक जप/भजन = सदैव अनुमत। गीता श्रवण = स्वीकार्य। घर में: बिना सूतक वाला सदस्य पूजा करे। सार: शरीर से पूजा वर्जित, मन से भक्ति कभी वर्जित नहीं।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
इस श्रेणी के अन्य प्रश्नोत्तर।