विस्तृत उत्तर
सूतक (अशौच) के दौरान मूर्ति पूजा, मंदिर, हवन — परंपरागत रूप से वर्जित। परंतु कुछ अपवाद हैं।
वर्जित
- ▸मूर्ति स्पर्श/पूजा
- ▸मंदिर प्रवेश
- ▸हवन/यज्ञ
- ▸शुभ कार्य
अनुमत
- 1मानसिक जप — मन में ईश्वर नाम जप, भजन — सदैव अनुमत। भगवान का नाम कभी वर्जित नहीं।
- 2गीता/रामायण श्रवण — सुनना स्वीकार्य (छूना नहीं — कुछ परंपरा)।
- 3शालिग्राम सेवा — कुछ वैष्णव परंपराओं में शालिग्राम पूजा सूतक में भी जारी रखी जाती है।
- 4एकादशी व्रत — कुछ परंपराओं में सूतक में भी एकादशी व्रत मान्य।
घर में पूजा कौन करे: परिवार का वह सदस्य जिसे सूतक नहीं लगा (भिन्न कुटुंब/दूर संबंधी), या पड़ोसी/मित्र से दीपक जलवाएं।
सार: शरीर से पूजा वर्जित, मन से भक्ति सदैव अनुमत।





