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सूतक के दौरान पूजा कर सकते हैं या नहीं

संक्षिप्त उत्तर

मूर्ति पूजा/मंदिर/हवन = वर्जित। मानसिक जप/भजन = सदैव अनुमत। गीता श्रवण = स्वीकार्य। घर में: बिना सूतक वाला सदस्य पूजा करे। सार: शरीर से पूजा वर्जित, मन से भक्ति कभी वर्जित नहीं।

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विस्तृत उत्तर

सूतक (अशौच) के दौरान मूर्ति पूजा, मंदिर, हवन — परंपरागत रूप से वर्जित। परंतु कुछ अपवाद हैं।

वर्जित

  • मूर्ति स्पर्श/पूजा
  • मंदिर प्रवेश
  • हवन/यज्ञ
  • शुभ कार्य

अनुमत

  1. 1मानसिक जप — मन में ईश्वर नाम जप, भजन — सदैव अनुमत। भगवान का नाम कभी वर्जित नहीं।
  2. 2गीता/रामायण श्रवण — सुनना स्वीकार्य (छूना नहीं — कुछ परंपरा)।
  3. 3शालिग्राम सेवा — कुछ वैष्णव परंपराओं में शालिग्राम पूजा सूतक में भी जारी रखी जाती है।
  4. 4एकादशी व्रत — कुछ परंपराओं में सूतक में भी एकादशी व्रत मान्य।

घर में पूजा कौन करे: परिवार का वह सदस्य जिसे सूतक नहीं लगा (भिन्न कुटुंब/दूर संबंधी), या पड़ोसी/मित्र से दीपक जलवाएं।

सार: शरीर से पूजा वर्जित, मन से भक्ति सदैव अनुमत।

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शास्त्रीय स्रोत
धर्मसिंधु, गरुड़ पुराण
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