तपस्या क्या है?
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तपस्या (तप) का अर्थ है शरीर, मन और वाणी पर कठोर अनुशासन लगाकर आत्मशुद्धि करना। गीता में तीन प्रकार के तप बताए गए हैं — शारीरिक, वाचिक और मानसिक। यह अष्टांग योग के नियमों में से एक है।
- 1वाल्मीकि ने रामायण लिखी
- 2वेदव्यास ने महाभारत की रचना की
- 3विश्वामित्र ने राजा से ब्रह्मर्षि का पद प्राप्त किया
- 4सात्विक तप — श्रद्धा से, फल की इच्छा रहित
- 5राजसिक तप — यश, सत्कार के लिए
- 6तामसिक तप — मूढ़ता से, दूसरों को कष्ट देने के उद्देश्य से
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साधना विज्ञान
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