हवन भस्म: यज्ञ अग्नि, सात्त्विक, सर्वसुलभ, नित्य पूजा, बिना दीक्षा। चिता भस्म: श्मशान अग्नि, तामसिक/उग्र, केवल दीक्षित तांत्रिक, विशेष अनुष्ठान। सामान्य भक्त = हवन भस्म/विभूति पर्याप्त। चिता भस्म = गुरु दीक्षा अनिवार्य।
- 1यज्ञ/हवन की अग्नि में आहुतियों (समिधा, घी, तिल, जौ) के दहन से प्राप्त।
- 2सात्त्विक — सभी भक्तों के लिए उपयुक्त।
- 3गोमय (गोबर) से बनी भस्म सर्वोत्तम विभूति मानी गई है।
- 4मंत्रों से अभिमंत्रित करने पर 'विभूति' (दिव्य भस्म) कहलाती है।
- 5त्रिपुण्ड्र, तिलक, शरीर लेपन में सुरक्षित प्रयोग।
- 6अधिकार: कोई भी भक्त बिना दीक्षा प्रयोग कर सकता है।
- 7श्मशान में मृत शरीर के दाह संस्कार की भस्म।
- 8तामसिक/उग्र — केवल उन्नत तांत्रिक साधकों के लिए।
- 9अघोर, कापालिक, नाथ परम्परा में विशेष प्रयोग।
- 10वैराग्य, मृत्यु भय विजय, उग्र शक्ति साधना से सम्बद्ध।
- 11अधिकार: केवल गुरु दीक्षित तांत्रिक साधक। सामान्य भक्तों के लिए वर्जित।
- 12स्रोत: हवन = यज्ञ अग्नि। चिता = श्मशान अग्नि।
- 13गुण: हवन = सात्त्विक। चिता = तामसिक/उग्र।
- 14अधिकार: हवन = सर्वसुलभ। चिता = दीक्षित तांत्रिक।
- 15प्रभाव: हवन = शांत, पवित्र। चिता = उग्र, भय निवारक।
- 16उपयोग: हवन = नित्य पूजा। चिता = विशेष तांत्रिक अनुष्ठान।