तंत्र में गुरु परंपरा का क्या महत्व है?
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गुरु परंपरा = तंत्र रीढ़। शक्ति: गुरु→शिष्य अखंड श्रृंखला। शुद्ध ज्ञान (मुखतः), सुरक्षा, पात्रता परीक्षण। कुलार्णव: शिव→शक्ति→गुरु→शिष्य। आगम-कल्पद्रुम: माता दीक्षा = 8 गुना फलदायी।
- 1शक्ति हस्तांतरण: तंत्र शक्ति = गुरु→शिष्य→शिष्य — अखंड श्रृंखला। टूटे = शक्ति लुप्त।
- 2शुद्ध ज्ञान: पुस्तक = अपूर्ण/गलत हो सकती। गुरु मुख = शुद्ध, अनुभव सिद्ध।
- 3सुरक्षा: गुरु परंपरा = सुरक्षा परंपरा — शिष्य की रक्षा।
- 4पात्रता परीक्षण: गुरु = शिष्य की योग्यता जांचकर ही ज्ञान दें — अपात्र को नहीं।
- 5विकिपीडिया (तन्त्र): 'इस दर्शन के अन्तर्गत गुरु परम्परा का विशेष महत्व है।'
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तंत्र शास्त्र
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