तंत्र में नित्य पूजा और नैमित्तिक पूजा में क्या अंतर है?
की चेकलिस्ट
नित्य: प्रतिदिन अनिवार्य (दैनिक पूजा/जप), छूटे=दोष। नैमित्तिक: विशेष अवसर (नवरात्रि/शिवरात्रि/ग्रहण), अवसर पर अनिवार्य। 'नित्यं नैमित्तिकं काम्यं त्रिविधं कर्म।' नित्य > नैमित्तिक (महत्व)।
- 1उदाहरण: दैनिक इष्ट पूजा, संध्या वंदन, मंत्र जप।
- 2दीक्षित साधक = नित्य पूजा अनिवार्य।
- 3'नित्यं नैमित्तिकं काम्यं त्रिविधं कर्म कीर्तितम्' — तीन कर्म: नित्य, नैमित्तिक, काम्य।
- 4उदाहरण: नवरात्रि, दीपावली, शिवरात्रि, ग्रहण, जन्मदिन।
- 5अवसर आने पर अनिवार्य, अन्यथा नहीं।
- 6नित्य = प्रतिदिन, अनिवार्य, सरल।
- 7नैमित्तिक = विशेष तिथि, अवसरानुसार, विस्तृत।
- 8नित्य > नैमित्तिक (महत्व) — 'नित्य छूटे = दोष, नैमित्तिक छूटे = कम दोष।'
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तंत्र शास्त्र
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