कारण: गुरु अभाव, उच्चारण दोष, विधि दोष, अनियमितता, श्रद्धा कमी (गीता: 'संशयात्मा विनश्यति'), अशुद्ध आचरण, अधीरता, अयोग्य मंत्र, गोपनीयता भंग, कर्म बाधा। उपाय: गुरु + धैर्य + नियमितता।
- 1गुरु दीक्षा का अभाव: बिना दीक्षा मंत्र = निद्रित/अचैतन्य।
- 2उच्चारण दोष: मंत्र में गलत उच्चारण = निष्फल/विपरीत।
- 3विधि दोष: न्यास, संकल्प, विनियोग छोड़ना = फल न्यून।
- 4अनियमितता: कभी-कभी जप, बीच में छोड़ना = शक्ति संचय नहीं।
- 5श्रद्धा/विश्वास की कमी: 'संशयात्मा विनश्यति' (गीता) — संदेही नष्ट।
- 6आचरण अशुद्ध: मांस-मदिरा, असत्य, अनैतिकता = साधना निष्फल।
- 7अधीरता: फल की जल्दबाजी — सिद्धि = समय मांगती है।
- 8