तंत्र साधना से सिद्धि कैसे मिलती है?
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तंत्र सिद्धि के पाँच अंग: गुरु कृपा, देव कृपा, पुरश्चरण, श्रद्धा और नित्यता। सिद्धि का क्रम: मंत्र स्थापना → जागृति (अजपा जप) → सिद्धि। संकेत: गहरी शांति, स्वप्न दर्शन, स्वतः जप। महानिर्वाण तंत्र: 'श्रद्धा से जपने पर सिद्धि में विलंब नहीं।'
- 1गुरु कृपा — बिना गुरु कृपा सिद्धि असंभव
- 2देव कृपा — इष्ट देवता की प्रसन्नता
- 3पुरश्चरण — निर्धारित जप संख्या पूर्ण करना
- 4श्रद्धा — अटूट विश्वास
- 5नित्यता — नियमित, बिना नागे साधना
- 6जप में गहरी शांति और आनंद
- 7स्वप्न में इष्ट देवता का दर्शन
- 8मंत्र का स्वतः मन में जप
- 9मनोकामना का स्वाभाविक पूर्ण होना
- 10मन में असाधारण निर्भयता
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तंत्र सिद्धि
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