तुलसी पत्ते नियम: रविवार, एकादशी, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, ग्रहण, संक्रांति, रात्रि — इन दिनों/समय न तोड़ें। नाखून-कैंची वर्जित — उँगली पोरों से तोड़ें। पहले प्रार्थना-क्षमा। बिना कारण न तोड़ें। पूजा वाली तुलसी अलग। 11 दिन बासी नहीं।
1रविवार — सूर्य देव का दिन, तुलसी पत्ते न तोड़ें।
2एकादशी — विष्णु जी को समर्पित, इस दिन एक दिन पहले (दशमी) तोड़कर रखें। (ध्यान दें: कुछ विद्वान एकादशी पर तोड़ने का निषेध मानते हैं, जबकि कुछ संतों ने इसे पाप नहीं माना। द्वादशी पर सर्वसम्मति से निषेध है।)
3द्वादशी — इस दिन तुलसी तोड़ना 'ब्रह्म हत्या' सम पाप माना गया है।
4रात्रि काल — सूर्यास्त के बाद कभी न तोड़ें।
5अमावस्या और पूर्णिमा — इन तिथियों पर भी तुलसी न तोड़ें।
6सूर्य-चन्द्र ग्रहण — ग्रहण काल में तुलसी न तोड़ें।