उपनिषद में ब्रह्म ज्ञान क्या है?
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उपनिषदों में ब्रह्मज्ञान 'अपरोक्षानुभूति' है — आत्मा और ब्रह्म की एकता का प्रत्यक्ष अनुभव। चार महावाक्य — 'अहं ब्रह्मास्मि', 'तत्त्वमसि', 'प्रज्ञानं ब्रह्म', 'अयमात्मा ब्रह्म' — इसके बीज हैं। मुण्डकोपनिषद (2/2/8) — ब्रह्मज्ञान से हृदय-ग्रंथि टूटती है और मोक्ष मिलता है।
- 1'प्रज्ञानं ब्रह्म' (ऐतरेय 3/3) — चेतना ही ब्रह्म है
- 2'अहं ब्रह्मास्मि' (बृहदारण्यक 1/4/10) — मैं ब्रह्म हूँ
- 3'तत्त्वमसि' (छान्दोग्य 6/8/7) — वह तू ही है
- 4'अयमात्मा ब्रह्म' (माण्डूक्य 1/2) — यह आत्मा ब्रह्म है
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