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उपनिषद में ज्ञान का महत्व क्या है?

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उपनिषदों में ज्ञान सर्वोच्च है। मुण्डकोपनिषद (1/1/3) परा विद्या (ब्रह्मज्ञान) को अपरा विद्या से श्रेष्ठ बताता है। (2/2/8) — ब्रह्मज्ञान से हृदय-ग्रंथि टूटती है, संशय दूर होते हैं। अनुभव-ज्ञान (अपरोक्षानुभूति) ही परम ज्ञान है।

  1. 1ब्रह्मवेत्ता दो विद्याएं बताते हैं — परा (ब्रह्मज्ञान) और अपरा (शास्त्र-ज्ञान)।
  2. 2परा विद्या से हृदय-ग्रंथि टूटती है, सभी संशय दूर होते हैं और सभी कर्म क्षय हो जाते हैं।
  3. 3आत्मा को बताने वाला भी आश्चर्य है, पाने वाला भी आश्चर्य है और जानने वाला भी आश्चर्य — क्योंकि आत्मज्ञान अत्यंत दुर्लभ है।
  4. 4शाब्दिक ज्ञान — श्रवण से प्राप्त
  5. 5बौद्धिक ज्ञान — मनन से प्राप्त
  6. 6अनुभव-ज्ञान (अपरोक्षानुभूति) — निदिध्यासन से प्राप्त — यही परम ज्ञान है
  7. 7जहाँ से वाणी मन सहित लौट आती है — वही आनंद-ब्रह्म है। ज्ञान की अंतिम सीमा वहाँ है जहाँ शब्द समाप्त हो जाते हैं।
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