वास्तु शास्त्र के अनुसार रसोई में गैस किस दिशा में रखें
की चेकलिस्ट
गैस/चूल्हा आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में रखें और खाना बनाते समय मुख पूर्व दिशा की ओर हो। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में गैस रखना सबसे बड़ा दोष है। सिंक और गैस साथ-साथ न रखें।
- 1आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) — सर्वोत्तम। यह अग्नि तत्व की दिशा है। रसोई स्वयं भी इसी कोण में होनी चाहिए और गैस भी इसी दिशा में रखें।
- 2खाना बनाने वाले का मुख — पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इसका अर्थ है कि गैस ऐसे रखें कि खाना बनाते समय मुख पूर्व की ओर हो।
- 3ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) — जल तत्व की दिशा, अग्नि से विरोध। सबसे बड़ा दोष।
- 4उत्तर दिशा — कुबेर की दिशा, यहां अग्नि धन हानि का कारण माना जाता है।
- 5खिड़की/दरवाजे के ठीक सामने — हवा से अग्नि अस्थिर होती है, व्यावहारिक और वास्तु दोनों दृष्टि से अनुचित।
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