वास्तु शास्त्र के अनुसार सीढ़ी किस दिशा में होनी चाहिए
की चेकलिस्ट
सीढ़ी नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम), दक्षिण या पश्चिम में हो। ईशान कोण में सीढ़ी सबसे बड़ा दोष। घुमाव clockwise, सीढ़ियां विषम संख्या में। सीढ़ी के नीचे पूजा स्थल या शयनकक्ष न बनाएं।
- 1नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) — सर्वोत्तम। यह भारी निर्माण की दिशा है।
- 2दक्षिण दिशा — दूसरा उत्तम विकल्प।
- 3पश्चिम दिशा — स्वीकार्य।
- 4घुमाव — सीढ़ी का घुमाव दक्षिणावर्त (clockwise — बाएं से दाएं ऊपर) होना चाहिए।
- 5सीढ़ियों की संख्या — विषम (odd) संख्या शुभ मानी जाती है — जैसे 5, 7, 9, 11, 13, 15, 17, 19, 21। कुछ परंपराओं में अंतिम सीढ़ी पर पैर बायां पड़ना शुभ माना जाता है।
- 6चौड़ाई — सीढ़ी संकरी न हो, पर्याप्त चौड़ी हो।
- 7टूटी सीढ़ियां — टूटी या दरार वाली सीढ़ियां तुरंत ठीक कराएं।
- 8सीढ़ी के नीचे — पूजा स्थल, रसोई या शयनकक्ष कदापि न बनाएं। सीढ़ी के नीचे स्टोर रूम बनाना स्वीकार्य है।
- 9अंधेरा — सीढ़ी में पर्याप्त प्रकाश हो, अंधेरी सीढ़ी अशुभ।
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वास्तु शास्त्र
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