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विवाह संस्कार में अग्नि के चारों फेरों का क्या महत्व है?

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अग्नि के चार फेरे = चार पुरुषार्थ: धर्म (धर्मपूर्वक जीवन), अर्थ (धनार्जन), काम (संतान), मोक्ष (आध्यात्मिक लक्ष्य)। अग्नि = पवित्रता और सत्य का प्रतीक। प्रथम चार फेरों में कन्या आगे। चार फेरे और सप्तपदी अलग-अलग क्रियाएँ हैं।

  1. 1प्रथम फेरा — धर्म: दम्पत्ति धर्मपूर्वक गृहस्थ जीवन जीने की प्रतिज्ञा करते हैं। धर्म गृहस्थ जीवन का मूल आधार है।
  2. 2द्वितीय फेरा — अर्थ: उचित धनार्जन और आर्थिक व्यवस्था की प्रतिज्ञा। गृहस्थ को सभी आश्रमों का भरण-पोषण करना होता है।
  3. 3तृतीय फेरा — काम: संतानोत्पत्ति, वंश-परम्परा और धर्मानुकूल काम-पूर्ति की प्रतिज्ञा।
  4. 4चतुर्थ फेरा — मोक्ष: अंतिम लक्ष्य मोक्ष प्राप्ति। दम्पत्ति साथ मिलकर आध्यात्मिक उन्नति करेंगे।
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