हस्तमेलाप: परस्पर स्वीकृति, रक्षा वचन ('गृभ्णामि ते सौभगत्वाय...'), ऊर्जा मिलन (शिव-शक्ति), कन्यादान (पिता→वर), अटूट बंधन (सात जन्म)। विवाह का सबसे पवित्र क्षण।
- 1स्वीकृति: वर वधू का हाथ पकड़ता है = 'मैं तुम्हें जीवनसंगिनी के रूप में स्वीकार करता हूँ।' वधू हाथ देती है = 'मैं तुम्हें पति रूप में स्वीकार करती हूँ।'
- 2रक्षा वचन: वर: 'गृभ्णामि ते सौभगत्वाय हस्तं...' (मैं सौभाग्य हेतु तुम्हारा हाथ ग्रहण करता हूँ।) = रक्षा, भरण-पोषण, सम्मान का वचन।
- 3ऊर्जा मिलन: दाहिना हाथ = सूर्य नाड़ी (पुरुष शक्ति)। वधू का दाहिना हाथ = उसकी सम्पूर्ण शक्ति वर को सौंपना। दोनों हाथ मिलकर = शिव-शक्ति एकता।
- 4कन्यादान: पिता वधू का हाथ वर के हाथ में देता है = कन्यादान। 'मैं अपनी पुत्री आपको सौंपता हूँ' — सबसे बड़ा दान।
- 5अटूट बंधन: हस्तमेलाप = बंधन जो मृत्यु तक (और कुछ परम्पराओं में सात जन्मों तक) अटूट।