सप्तपदी = सात कदम/फेरे। अग्नि साक्षी में वर-वधू सात परिक्रमा करते हैं। सात पद: अन्न, बल, धन, सुख, संतान, ऋतु-सहभाग, मित्रता। 'मैत्री सप्तपदीन मुच्यते।' बिना सप्तपदी विवाह अपूर्ण। ध्रुव तारा साक्षी। वैदिक विवाह का अभिन्न अंग।
- 1प्रथम पद (अन्न): भोजन व्यवस्था — गृहस्थ जीवन में अन्न की कमी न हो।
- 2द्वितीय पद (बल): शक्ति संचय, आहार और संयम — शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य।
- 3तृतीय पद (धन): धन-सम्पत्ति की प्रबंध व्यवस्था — आर्थिक सुदृढ़ता।
- 4चतुर्थ पद (सुख): आत्मिक सुख और परस्पर प्रेम-सम्मान।
- 5पंचम पद (संतान): पशुधन और संतान की कामना — वंश परम्परा।
- 6षष्ठ पद (ऋतु): सभी ऋतुओं में उचित रहन-सहन — सुख-दुख में साथ।
- 7सप्तम पद (सखा): परस्पर मित्रता, वफादारी और जीवनपर्यंत साथ।