सिंदूरदान = पति द्वारा वधू की माँग में सिंदूर भरना — विवाह पूर्णता का प्रतीक। अर्थ: सौभाग्य चिह्न, पति-पत्नी बन्धन की घोषणा। पार्वती सदैव सिंदूर धारण करती हैं। लाल रंग = शक्ति, ऊर्जा। माँग = सहस्रार चक्र स्थान। सप्तपदी के बाद, 'सौभाग्यवती भव' मंत्र।
- 1माता पार्वती सदैव सिंदूर धारण करती हैं — वे आदर्श सुहागिन का प्रतीक हैं।
- 2सिंदूर लाल रंग का है — लाल रंग शक्ति, ऊर्जा, और सौभाग्य का प्रतीक।
- 3सिंदूर भगवती लक्ष्मी का भी प्रतीक माना गया है।
- 4माँग (सिर का ऊपरी भाग) = सहस्रार चक्र का स्थान। सिंदूर लगाने से इस चक्र पर सकारात्मक प्रभाव माना जाता है।
- 5लाल रंग = तेज, ऊर्जा, प्राणशक्ति।
- 6सप्तपदी के बाद (या कुछ परम्पराओं में साथ में)।
- 7वर, वधू की माँग में सिंदूर भरता है।
- 8मंत्रोच्चार: 'सौभाग्यवती भव' (सौभाग्यशाली बनो) या विशिष्ट मंत्र।
- 9यह क्षण विवाह की पूर्णता माना जाता है।