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Kotapārh चौघड़िया 4 अगस्त 2026, मंगलवार

छत्तीसगढ़

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चौघड़िया — 4 अगस्त 2026, मंगलवार

रोग
05:3807:15
अशुभ
उद्वेग
07:1508:53
अशुभ
चर
08:5310:30
सामान्य
लाभ
10:3012:07
लाभकारी
अमृत
12:0713:44
अत्यंत शुभ
काल
13:4415:21
अशुभ
शुभ
15:2116:58
शुभ
रोग
16:5818:35
अशुभ
काल
18:3519:58
अशुभ
लाभ
19:5821:21
लाभकारी
उद्वेग
21:2122:44
अशुभ
शुभ
22:4400:07
शुभ
अमृत
00:0701:30
अत्यंत शुभ
चर
01:3002:53
सामान्य
रोग
02:5304:15
अशुभ
काल
04:1505:38
अशुभ

अन्य शहरों का चौघड़िया — 4 अगस्त 2026, मंगलवार

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चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया (Choghadiya) वैदिक ज्योतिष में प्रतिदिन शुभ-अशुभ समय जानने की एक सरल और प्रभावी पद्धति है। इसमें दिन और रात को सात-सात भागों में बाँटा जाता है। प्रत्येक भाग लगभग 1.5 घंटे (90 मिनट) का होता है।

शुभ चौघड़िया: अमृत (सर्वश्रेष्ठ), शुभ, लाभ — नए कार्य, यात्रा, व्यापार के लिए उत्तम।
सामान्य: चर — यात्रा के लिए ठीक।
अशुभ: रोग, काल, उद्वेग — इन समय में शुभ कार्य न करें।

शुभ स्लॉट को सही प्राथमिकता दें

Kotapārh में 4 अगस्त 2026, मंगलवार के चौघड़िया को पढ़ने का व्यावहारिक तरीका

Kotapārh में 4 अगस्त 2026, मंगलवार का चौघड़िया पेज दिन और रात के स्लॉट में जल्दी निर्णय लेने के लिए सबसे उपयोगी है। इसका मुख्य उद्देश्य अमृत, शुभ और लाभ जैसे अच्छे काल को तुरंत अलग करना है।

चर चौघड़िया यात्रा या सामान्य काम के लिए ठीक हो सकता है, लेकिन बड़े मांगलिक कार्यों के लिए अमृत, शुभ या लाभ को प्राथमिकता देना बेहतर रहता है। काल, रोग और उद्वेग जैसे स्लॉट से बचना चाहिए।

जब काम किसी और शहर में होना हो, तो इसी तारीख के दूसरे शहरों का चौघड़िया भी देखें। 10 लिंक उसी तुलना को आसान बनाते हैं और गलत शहर का समय चुनने से बचाते हैं।

महत्वपूर्ण शुरुआत के लिए अमृत, शुभ और लाभ स्लॉट को पहले देखें.

यदि स्लॉट सामान्य हो, तो उसी दिन का राहुकाल और पंचांग सारांश भी मिलाकर निर्णय लें.

विवाह, गृहप्रवेश या बड़े संस्कार के लिए चौघड़िया के साथ तिथि और नक्षत्र भी जरूर जाँचें.

Kotapārh चौघड़ियाKotapārh राहुकालKotapārh पंचांग

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र: Kotapārh में 4 अगस्त 2026, मंगलवार को शुभ चौघड़िया कब है?
उ: Kotapārh में 4 अगस्त 2026, मंगलवार के चौघड़िया में अमृत, शुभ और लाभ काल शुभ कार्यों के लिए उत्तम हैं।
प्र: चौघड़िया क्या है?
उ: चौघड़िया वैदिक ज्योतिष में दिन और रात को सात-सात भागों में बाँटने की पद्धति है। प्रत्येक भाग लगभग 1.5 घंटे का होता है। अमृत, शुभ और लाभ श्रेष्ठ माने जाते हैं।
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