शिव पूजा नियमशिव की पूजा सूर्योदय से पहले करनी चाहिए या बाद में?ब्रह्ममुहूर्त (सूर्योदय से पहले 4-5:30 AM) सर्वोत्तम। सूर्योदय बाद प्रातःकाल भी पूर्णतः शुभ। संध्या (प्रदोष) भी शुभ। शिव = महाकाल, समय से परे — नियमितता > विशिष्ट समय।#सूर्योदय#समय#ब्रह्ममुहूर्त
शिव पर्वश्रावण सोमवार व्रत की पूजा विधि और नियम क्या हैं?व्रत: सूर्योदय-सूर्यास्त, निराहार/फलाहार, ब्रह्मचर्य। पूजा: जलाभिषेक → पंचामृत → चंदन → बेलपत्र → 108 जप → स्तोत्र → कर्पूर आरती → कथा। सभी सोमवार व्रत रखें — अधूरा अशुभ। 16 सोमवार व्रत भी विकल्प।#श्रावण सोमवार#व्रत#विधि
शिव ग्रंथशिव पुराण का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?श्रावण सर्वोत्तम, शिवरात्रि/सोमवार/प्रदोष शुभ। 7 संहिताएं। शुद्ध होकर, शिव समक्ष, दीपक जलाकर। सप्ताह पारायण (7 दिन)। ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार। गीता प्रेस संस्करण सर्वमान्य। फल: सर्व पाप नाश + मोक्ष।#शिव पुराण#पाठ#विधि
शिव स्तोत्रशिव चालीसा पढ़ने का सही समय और विधि क्या है?सही समय: प्रातःकाल/संध्या, सोमवार, प्रदोष, शिवरात्रि। विधि: स्नान → शुद्ध वस्त्र → शिव समक्ष → दीपक → 'ॐ नमः शिवाय' → चालीसा पाठ → आरती। दैनिक 1 बार, विशेष पर 3-7-11 बार। सावन में प्रतिदिन। कष्ट निवारण, शांति, समृद्धि।#शिव चालीसा#40 चौपाई#विधि
शिव पूजाशिव की पूजा से ग्रह दोष निवारण कैसे होता है?शिव = महाकाल, नवग्रह नियंत्रक। शनि: शनि प्रदोष + काले तिल। राहु-केतु: त्र्यंबकेश्वर/नागेश्वर। चंद्र: सोमवार + दूध। सर्व: महामृत्युंजय सवा लाख + रुद्राभिषेक + 'ॐ नमः शिवाय' 108 दैनिक।#ग्रह दोष#निवारण#नवग्रह