विस्तृत उत्तर
शिव पुराण 18 महापुराणों में से एक और शिव भक्तों का सर्वप्रमुख ग्रंथ है:
शिव पुराण की संरचना (शोध सत्यापित)
7 संहिताएं: विद्येश्वर, रुद्र (5 खंड), शतरुद्र, कोटिरुद्र, उमा, कैलाश, वायवीय (2 खंड)।
कब पाठ करें
- ▸श्रावण मास: सर्वोत्तम — पूरे मास शिव पुराण पाठ का विधान।
- ▸महाशिवरात्रि: रात भर शिव पुराण कथा श्रवण।
- ▸प्रदोष काल: संध्या समय पाठ शुभ।
- ▸सोमवार: शिव का दिन।
- ▸कोई भी शुभ दिन: शिव पुराण का पाठ कभी भी किया जा सकता है।
कैसे पाठ करें
- 1स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें।
- 2शिवलिंग/शिव चित्र के समक्ष बैठें।
- 3दीपक जलाएं।
- 4'ॐ नमः शिवाय' 3 बार जपकर आरंभ।
- 5श्रद्धापूर्वक पाठ करें — यदि संस्कृत न आए तो हिंदी अनुवाद पढ़ें।
- 6प्रतिदिन एक निश्चित भाग पढ़ें — 7 दिन में सम्पूर्ण (सप्ताह पारायण) या अधिक दिनों में।
- 7पाठ समापन पर शिव को प्रणाम।
नियम
- ▸पाठ के दौरान ब्रह्मचर्य, सात्विक आहार।
- ▸भूमि शयन (यदि संभव)।
- ▸एक बार आरंभ करें तो पूर्ण करें।
- ▸गीता प्रेस गोरखपुर का शिव पुराण संस्करण सर्वमान्य।
फल (शिव पुराण माहात्म्य)
शिव पुराण का श्रवण/पाठ सभी पापों का नाश करता है और मोक्ष प्रदान करता है।





