ध्यान साधनाध्यान से करुणा कैसे बढ़ती है?ध्यान→करुणा: (1) अहंकार विलय→भेद कम (2) अनाहत चक्र खुलना (3) योगसूत्र 1.33: 'दुःखी पर करुणा=चित्त प्रसन्न' (4) साक्षी भाव→सच्ची करुणा (5) एकता बोध (सब एक) (6) मन शांत→हृदय सुनाई। अभ्यास: मैत्री ध्यान ('सभी सुखी हों')। वैज्ञानिक: ध्यान=मस्तिष्क करुणा क्षेत्र↑।#करुणा#मैत्री ध्यान#अनाहत चक्र
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्वअनाहत चक्र और माँ कूष्मांडा का क्या संबंध है?माँ कूष्मांडा = सृष्टि की आरंभिक ऊर्जा का प्रतीक। इनकी आराधना से साधक का अनाहत चक्र जाग्रत होता है → प्रेम + करुणा + स्वास्थ्य के गुण विकसित।
चक्र शोधन और कुंडलिनी जागरणअनाहत चक्र का बीज मंत्र क्या है?अनाहत चक्र का बीज मंत्र 'यं' (Yam) है — यह हृदय में स्थित, वायु तत्त्व से संबद्ध है। साधना से प्रेम, करुणा, क्षमा और हृदय रोगों से रक्षा होती है।#अनाहत चक्र#यं बीज#वायु तत्व
ध्यान साधनाध्यान से करुणा कैसे बढ़ती है?ध्यान→करुणा: (1) अहंकार विलय→भेद कम (2) अनाहत चक्र खुलना (3) योगसूत्र 1.33: 'दुःखी पर करुणा=चित्त प्रसन्न' (4) साक्षी भाव→सच्ची करुणा (5) एकता बोध (सब एक) (6) मन शांत→हृदय सुनाई। अभ्यास: मैत्री ध्यान ('सभी सुखी हों')। वैज्ञानिक: ध्यान=मस्तिष्क करुणा क्षेत्र↑।#करुणा#मैत्री ध्यान#अनाहत चक्र
कुंडलिनी योगअनाहत चक्र खुलने पर हृदय में कैसा अनुभव होता है?अनाहत: (1) हृदय विस्तार (2) सार्वभौमिक प्रेम (3) सहज करुणा (4) अनाहत नाद (5) Emotional Release (रोना) (6) सृजनशीलता↑ (7) हरा/गुलाबी प्रकाश (8) सम्बंध गहराई। संवेदनशीलता=संतुलन। हृदय दर्द=चिकित्सक।#अनाहत चक्र#हृदय चक्र#प्रेम