मंत्र जपमंत्र जप से आध्यात्मिक जागरण कैसे होता है?
गीता (10.10-11): निरंतर प्रीतिपूर्वक जप करने वाले को भगवान स्वयं ज्ञान-दीप देते हैं। प्रक्रिया: चित्त-शुद्धि → शक्तिपात → कुण्डलिनी जागरण → स्वरूप-बोध। जागरण के लक्षण: भगवान में परम प्रीति, वैराग्य, सर्वत्र ईश्वर-दर्शन, अकारण आनंद। जागरण एक प्रक्रिया है, घटना नहीं।