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कुलार्णव तंत्र से जुड़े सभी प्रश्न(5)

कुलार्णव तंत्र पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

दीक्षा के लिए शिष्य की पात्रता

कुलार्णव तंत्र में सच्चे शिष्य की क्या परिभाषा है?

कुलार्णव तंत्र: सच्चा शिष्य वह है जो अपना तन, मन, धन और प्राण (सर्वस्व) गुरु के चरणों में समर्पित करने को तत्पर हो।

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गुरु की अनिवार्यता

प्राण प्रतिष्ठा के लिए गुरु क्यों जरूरी है?

कुलार्णव तंत्र कहता है गुरु के बिना समस्त साधना निष्फल है — दीक्षा में गुरु ज्ञान के साथ अपनी शक्ति का अंश (शक्तिपात) भी शिष्य में संचारित करते हैं जो शास्त्र के निर्जीव अक्षरों को जीवंत बनाता है।

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गुरु कृपा और साधना मर्म

त्रिपुर भैरवी साधना में गुरु की जरूरत क्यों है?

कुलार्णव तंत्र कहता है कि बिना गुरु-दीक्षा के महाविद्या साधना निष्फल हो सकती है — गुरु का मंत्र उनकी तपस्या और चैतन्य से युक्त होता है जो शिष्य में शीघ्र फलित होता है।

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कन्या पूजन

मासिक दुर्गाष्टमी पर कुमारी (कन्या) पूजन कैसे करें?

कन्या के पैर धोकर उन्हें आसन पर बिठाएं, माथे पर तिलक लगाएं और भोजन (हलवा, पूरी, चना) कराएं। बाद में लाल वस्त्र या फल और दक्षिणा देकर उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें।

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तंत्र नियम

तंत्र साधना के नियम क्या हैं?

तंत्र साधना के नियम: गुरु दीक्षा सर्वोपरि है। सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य, सत्य वचन, गोपनीयता, नित्य एक समय-स्थान पर साधना और श्रद्धा अनिवार्य हैं। अहंकार, गुरु-निंदा और साधना का प्रदर्शन साधना को नष्ट करते हैं।

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