लोक'कृतक', 'अकृतक' और 'कृतकाकृतक' लोकों में क्या अंतर है?कृतक लोक (त्रैलोक्य) विनाशी हैं, अकृतक (जनलोक से सत्यलोक तक) नित्य हैं। महर्लोक कृतकाकृतक है — नैमित्तिक प्रलय में भस्म नहीं होता पर निर्जन हो जाता है।#कृतक#अकृतक#कृतकाकृतक
लोकत्रैलोक्य और महर्लोक में क्या अंतर है?त्रैलोक्य (भूः, भुवः, स्वः) कृतक अर्थात विनाशशील है और सकाम कर्मों का फल-भोग क्षेत्र है। महर्लोक कृतकाकृतक है — आंशिक रूप से अविनाशी और विशुद्ध तपोमयी लोक।#त्रैलोक्य#महर्लोक
लोककृतक और अकृतक लोकों में क्या मौलिक अंतर है?कृतक लोक (भूलोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक) प्रलय में पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। अकृतक लोक (महर्लोक आदि) प्रलय से आंशिक रूप से ही प्रभावित होते हैं।#कृतक#अकृतक#भुवर्लोक