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चार धाराएँ से जुड़े सभी प्रश्न(3)

चार धाराएँ पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

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मार्कण्डेय पुराण में गंगा की चार धाराओं का वर्णन कैसे है?

मार्कण्डेय पुराण में गंगा की चार धाराओं का विस्तृत भौगोलिक मार्ग बताया गया है — सीता (पूर्व-भद्राश्व), अलकनंदा (दक्षिण-भारतवर्ष), चक्षु (पश्चिम-केतुमाल), सोमा (उत्तर-उत्तरकुरु)।

#मार्कण्डेय पुराण#गंगा#चार धाराएँ
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गंगा की चार धाराओं के नाम और दिशाएँ क्या हैं?

गंगा की चार धाराएँ — सीता (पूर्व, भद्राश्व), अलकनंदा/भागीरथी (दक्षिण, भारतवर्ष), चक्षु (पश्चिम, केतुमाल), सोमा/भद्रा (उत्तर, उत्तरकुरु)।

#गंगा#चार धाराएँ#सीता पूर्व
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भूलोक पर गंगा की कितनी धाराएँ हैं?

गंगा मेरु पर्वत से चार धाराओं में बँटती हैं — सीता (पूर्व), अलकनंदा/भागीरथी (दक्षिण), चक्षु (पश्चिम) और सोमा/भद्रा (उत्तर)।

#गंगा#चार धाराएँ#सीता
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