प्रमुख मंदिरनवरात्रि के पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता के बारे में क्या मान्यता है?नवरात्रि पाँचवें दिन: साक्षात स्कंदमाता धरती पर भ्रमण करती हैं → दर्शन मात्र से भक्तों के रोग-दोष दूर। लोकविश्वास: पार्वती आज भी कैलाश पर दोनों पुत्रों (स्कंद + गणेश) के साथ विराजमान। शरण में जाने वाले भक्त की गोद खुशियों से भरती हैं।#नवरात्रि पाँचवाँ दिन#धरती भ्रमण#रोग दोष
नाम और स्वरूपमाँ स्कंदमाता कौन हैं और उनके नाम का क्या अर्थ है?स्कंदमाता = 'स्कंद (कार्तिकेय) की माता।' स्कंद = शिव-पार्वती के पुत्र, जिन्हें कार्तिकेय, सुब्रमण्य या कुमार भी कहते हैं। माता पार्वती का वह रूप जिसमें उन्होंने पुत्र स्कंद को गोद में धारण किया। नवरात्रि के पाँचवें दिन पूजा।