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नाद-ब्रह्म से जुड़े सभी प्रश्न(3)

नाद-ब्रह्म पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

नाद-ब्रह्म का अर्थ क्या है?

नाद-ब्रह्म का अर्थ है ध्वनि या कंपन को सृष्टि का मूल आधार मानना।

#नाद-ब्रह्म#ध्वनि#सृष्टि
शिव पूजा

शिव पूजा में मंत्र जप क्यों किया जाता है?

मंत्र जप क्यों: पतञ्जलि (1.27-28): मंत्र = ईश्वर का वाचक, जप = साक्षात्कार। नाद बिंदु उपनिषद: नाद-ब्रह्म = परब्रह्म-प्राप्ति। मन-एकाग्रता का सरलतम उपाय। संस्कार-निर्माण (मृत्यु-काल भी)। मांडूक्य: ॐ-ध्वनि = वातावरण-शुद्धि। नित्य 108 जप।

#शिव पूजा#मंत्र जप#नाद-ब्रह्म
वेद ज्ञान

वेदों में मंत्रों का महत्व क्या है?

वेदों में मंत्र नाद-ब्रह्म का स्वरूप हैं — शाश्वत ध्वनि-शक्ति जो देवताओं को आकर्षित करती और चित्त को शुद्ध करती है। गायत्री मंत्र (ऋग्वेद 3/62/10) 'वेद-माता' है। ॐ ब्रह्मांड की आदि-ध्वनि और ब्रह्म का प्रथम प्रकटीकरण है।

#मंत्र#वेद#गायत्री
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