मंदिर परम्परामंदिर में अष्टधातु की मूर्ति का क्या विशेष महत्व है?अष्टधातु = 8 धातु (सोना+चाँदी+ताँबा+टिन+जस्ता+सीसा+लोहा+पारद/काँसा)। विशेष: प्रत्येक धातु=एक ग्रह — स्वतः ग्रह शान्ति। ऊर्जा चालकता उच्चतम — प्राण प्रतिष्ठा सर्वाधिक प्रभावी। दीर्घायु (सदियों तक अक्षत)। अष्टधातु>पंचधातु>पत्थर। सावधानी: नकली से बचें।#अष्टधातु#आठ धातु#मूर्ति सामग्री
मंदिर परम्परामंदिर में पंचधातु की मूर्ति और संगमरमर की मूर्ति में कौन उत्तम है?शास्त्रीय श्रेष्ठता: पंचधातु > संगमरमर (ऊर्जा चालकता, प्राण प्रतिष्ठा प्रभाव)। पंचधातु: सोना+चाँदी+ताँबा+जस्ता+लोहा — मंत्र शक्ति धारण, दीर्घायु। संगमरमर: सुन्दर, शीतल, सस्ता — अम्लीय अभिषेक से क्षति। दोनों शुभ। सम्पूर्ण क्रम: स्वर्ण > रजत > पंचधातु > ताँबा/पीतल > पत्थर > लकड़ी।