लोकसत्यलोक को मृत्युंजय लोक क्यों कहते हैं?सत्यलोक में नैमित्तिक प्रलय तक कोई मृत्यु नहीं होती और निवासी 15,480 अरब वर्ष जीवित रहते हैं। इसीलिए इसे मृत्युंजय लोक कहते हैं।#मृत्युंजय#सत्यलोक#मृत्यु नहीं
जीवन एवं मृत्युनरक में जीव को मरने क्यों नहीं दिया जाता?नरक में मृत्यु नहीं — क्योंकि पाप-फल पूरा भोगना है, आत्मा शाश्वत है (नष्ट नहीं होती), शुद्धि-प्रक्रिया पूर्ण करनी है। 'जलती रहती है पर भस्म नहीं होती।'#नरक#मृत्यु नहीं#कारण
जीवन एवं मृत्युक्या नरक में जीव को मृत्यु नहीं आती?नरक में मृत्यु नहीं — 'आत्मा जलती रहती है पर भस्म नहीं होती।' पाप-फल पूरा भोगने तक यातना जारी। बेहोश होने पर भी यमदूत जगाते हैं। पाप-फल समाप्त होने पर अगले जन्म।#नरक#मृत्यु नहीं#यातना
जीवन एवं मृत्युनरक में जीव को मृत्यु क्यों नहीं आती?नरक में जीव को इसलिए मृत्यु नहीं आती क्योंकि 'बिना भोगे कर्म समाप्त नहीं होता।' यातना-देह विशेष रूप से बनी है जो मरती नहीं। संजीवन नरक में मारकर बार-बार पुनः जीवित किया जाता है।#नरक#मृत्यु नहीं#यातना देह