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मृत्यु नहीं से जुड़े सभी प्रश्न(4)

मृत्यु नहीं पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 4 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

सत्यलोक को मृत्युंजय लोक क्यों कहते हैं?

सत्यलोक में नैमित्तिक प्रलय तक कोई मृत्यु नहीं होती और निवासी 15,480 अरब वर्ष जीवित रहते हैं। इसीलिए इसे मृत्युंजय लोक कहते हैं।

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जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को मरने क्यों नहीं दिया जाता?

नरक में मृत्यु नहीं — क्योंकि पाप-फल पूरा भोगना है, आत्मा शाश्वत है (नष्ट नहीं होती), शुद्धि-प्रक्रिया पूर्ण करनी है। 'जलती रहती है पर भस्म नहीं होती।'

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जीवन एवं मृत्यु

क्या नरक में जीव को मृत्यु नहीं आती?

नरक में मृत्यु नहीं — 'आत्मा जलती रहती है पर भस्म नहीं होती।' पाप-फल पूरा भोगने तक यातना जारी। बेहोश होने पर भी यमदूत जगाते हैं। पाप-फल समाप्त होने पर अगले जन्म।

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जीवन एवं मृत्यु

नरक में जीव को मृत्यु क्यों नहीं आती?

नरक में जीव को इसलिए मृत्यु नहीं आती क्योंकि 'बिना भोगे कर्म समाप्त नहीं होता।' यातना-देह विशेष रूप से बनी है जो मरती नहीं। संजीवन नरक में मारकर बार-बार पुनः जीवित किया जाता है।

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