श्राद्ध दर्शनसर्प योनि वाले पितर को श्राद्ध कैसे प्राप्त होता है?सर्प आदि रेंगने वाली योनियों में स्थित पितर को श्राद्ध का अंश 'वायु' बनकर तृप्ति देता है। मंत्र शक्ति से अन्न उनकी योनि के योग्य रूप में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।#सर्प योनि#वायु#पितर
श्राद्ध दर्शनपशु योनि वाले पितर को श्राद्ध का अंश क्या बनकर मिलता है?पशु योनि में स्थित पितर को श्राद्ध का अंश 'तृण' (घास) बनकर मिलता है। पशु अन्न नहीं खा सकते — इसलिए मंत्र शक्ति से अन्न उनके योग्य घास में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।#पशु योनि#तृण#घास
श्राद्ध दर्शनअसुर योनि में पितर को श्राद्ध कैसे मिलता है?असुर योनि में स्थित पितर को श्राद्ध का अन्न 'विविध भोगों' के रूप में प्राप्त होता है। मंत्र शक्ति + श्रद्धा से अन्न उनकी योनि के योग्य रूप में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।#असुर योनि#विविध भोग#पितर
श्राद्ध दर्शनदेवता बने पितर को श्राद्ध का अन्न किस रूप में मिलता है?श्रेष्ठ कर्मों से देवत्व प्राप्त पितर को श्राद्ध का अन्न 'अमृत' रूप में मिलता है। मंत्र शक्ति + श्रद्धा से स्थूल अन्न देव योनि के लिए दिव्य अमृत में रूपांतरित हो जाता है। मत्स्य/स्कंद पुराण का दर्शन।#देव योनि#अमृत#पितर
श्राद्ध दर्शनपृथ्वी पर अर्पित अन्न पितरों को कैसे मिलता है?मत्स्य/स्कंद पुराण: पितर की योनि के अनुसार अन्न रूपांतरित होता है — देव योनि = अमृत, असुर योनि = भोग, पशु योनि = तृण (घास), सर्प योनि = वायु। मंत्र शक्ति + श्रद्धा से यह सूक्ष्म रूपांतरण होता है।#पारलौकिक विज्ञान#मत्स्य पुराण#स्कंद पुराण