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श्लोक से जुड़े सभी प्रश्न(6)

श्लोक पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 6 प्रश्न उपलब्ध हैं।

शास्त्र ज्ञान

अहिंसा परमो धर्मः का पूरा श्लोक क्या है?

महाभारत, अनुशासन पर्व 115.23 — 'अहिंसा परमो धर्मस्तथाहिंसा परं तपः। अहिंसा परमं सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते॥' अर्थ: अहिंसा परम धर्म, परम तप और परम सत्य है। 'धर्म हिंसा तथैव च' वाला अर्धश्लोक प्रामाणिक महाभारत में उपलब्ध नहीं है।

#अहिंसा#महाभारत#धर्म
गृहस्थ धर्म

अंतिम समय गीता कौन सा श्लोक सुनाएं

गीता 8.5 (अंतिम स्मरण=गति), 18.66 ('शरण आजा=मुक्त'), 2.22 (शरीर=कपड़े)। 'राम'/महामृत्युंजय जप। गंगाजल। शांत वातावरण; रोएं नहीं (आत्मा सुनती)।

#अंतिम समय#गीता#श्लोक
हिंदू दर्शन

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते श्लोक का अर्थ

मनुस्मृति 3.56 — जहां नारियां सम्मानित होती हैं, वहां देवता निवास करते हैं। जहां सम्मान नहीं, सब कर्म निष्फल। 3.57 — जहां स्त्रियां दुःखी, वह कुल नष्ट; जहां प्रसन्न, वह कुल सदा बढ़ता है। 'पूजन' = सम्मान, अधिकार, गरिमा, प्रेम।

#नारी सम्मान#मनुस्मृति#श्लोक
हिंदू दर्शन

यदा यदा हि धर्मस्य श्लोक का अर्थ क्या है

गीता 4.7-8 — जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब भगवान प्रकट होते हैं — सज्जनों की रक्षा, दुष्टों के विनाश और धर्म स्थापना के लिए — प्रत्येक युग में। यह अवतारवाद का मूल सिद्धांत और शाश्वत आश्वासन है।

#गीता#श्लोक#अवतार
हिंदू दर्शन

वासांसि जीर्णानि श्लोक का अर्थ क्या है

गीता 2.22 — जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र बदलकर नए पहनता है, वैसे ही आत्मा पुराना शरीर छोड़कर नया धारण करती है। तात्पर्य: मृत्यु = वस्त्र बदलना; शरीर नाशवान, आत्मा शाश्वत। मृत्यु का भय अज्ञानता है।

#गीता#वासांसि जीर्णानि#आत्मा
गीता अध्ययन

भगवद गीता का पाठ कैसे करें?

गीता का पाठ प्रातःकाल स्नान के पश्चात, शांत मन से, श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। पहले महात्म्य पढ़ें, फिर श्लोकों का अर्थ समझते हुए क्रमशः अध्याय 1 से 18 तक पाठ करें और ज्ञान को जीवन में उतारें।

#गीता पाठ#विधि#नियम
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