भक्ति एवं आध्यात्मसामूहिक प्रार्थना व्यक्तिगत से ज्यादा शक्तिशाली क्योंसामूहिक प्रार्थना इसलिए शक्तिशाली है क्योंकि अनेक चेतनाओं की ऊर्जा एक साथ उठती है, ध्वनि का अनुनाद बढ़ता है और भाव-संक्रमण से सबको लाभ मिलता है। 'संघे शक्तिः कलौ युगे' — शास्त्र का वचन है।#सामूहिक प्रार्थना#कीर्तन#संकीर्तन
मंदिर भक्तिमंदिर में भजन कीर्तन कब करना चाहिए?सर्वोत्तम: सायंकाल (संध्या आरती बाद), प्रातःकाल (ब्रह्ममुहूर्त)। विशेष: एकादशी जागरण, नवरात्रि, जन्माष्टमी। नारद: कभी भी (भक्ति बंधन-रहित)। प्रकार: नाम-कीर्तन (सरलतम), भजन, संकीर्तन, आरती। नियम: मंदिर अनुमति, शोर न हो, भक्ति-भाव प्रधान। भागवत: कलियुग में कीर्तन = मुक्ति।
मंत्र विधिअखंड नाम संकीर्तन और अखंड जप में क्या अंतर है?संकीर्तन: सामूहिक, सस्वर गायन, संगीत, बहिर्मुखी, भक्ति प्रसार। जप: व्यक्तिगत, मौन/उपांशु, माला, अंतर्मुखी, मंत्र सिद्धि। चैतन्य: संकीर्तन श्रेष्ठ। योग: जप श्रेष्ठ। दोनों सत्य — मार्ग भिन्न, लक्ष्य एक।#संकीर्तन#अखंड जप#भजन