लोकस्वर्लोक के प्लक्ष द्वीप में सूर्य उपासना की विधि क्या है?प्लक्ष द्वीप में त्रयी विद्या (ऋक्, साम, यजुर्वेद) के माध्यम से सूर्य देव के त्रयीमय स्वरूप की उपासना होती है जो 'स्वर्ग का द्वार' खोलती है।#प्लक्ष द्वीप#सूर्य उपासना#त्रयी विद्या
व्रत एवं त्योहारछठ पूजा में अर्घ्य देने की विधि क्या है?छठ में दो अर्घ्य होते हैं — तीसरे दिन संध्या में डूबते सूर्य को और चौथे दिन उगते सूर्य को। बाँस के सूप में प्रसाद सजाकर, जल में खड़े होकर तांबे के लोटे से जल-दूध मिश्रित अर्घ्य दिया जाता है। 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र के साथ हाथ सिर के ऊपर रखकर सूर्य को अर्पण किया जाता है।#छठ पूजा#अर्घ्य#सूर्य उपासना
त्योहार पूजाछठ पूजा में डूबते और उगते सूर्य दोनों को अर्घ्य क्यों देते हैं?डूबता सूर्य अर्घ्य: कृतज्ञता (दिनभर का धन्यवाद), षष्ठी तिथि विशेष, कठिन समय में भी श्रद्धा, संहार-विश्राम का सम्मान। उगता सूर्य: नवजीवन, व्रत पूर्णता, वैदिक परम्परा। दोनों मिलकर = जीवनचक्र पूर्णता।#छठ अर्घ्य#डूबता सूर्य#उगता सूर्य
मंत्र सिद्धिगायत्री मंत्र की सिद्धि कैसे करें?गायत्री = 24 अक्षर → पुरश्चरण = 24 लाख जप। त्रिसंध्या उपासना सर्वोत्तम। साधना: सूर्यमुखी, लाल-पीले वस्त्र, स्फटिक माला, ब्रह्मचर्य। हवन (10वाँ भाग), तर्पण, मार्जन। ध्यान: हंसवाहिनी गायत्री देवी। सिद्धि: प्रकाश-अनुभव और बुद्धि-स्पष्टता।#गायत्री#सिद्धि विधि#पुरश्चरण