विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत पुराण के पंचम स्कंध के बीसवें अध्याय में प्लक्ष द्वीप में सूर्य उपासना की विधि का वर्णन है। यहाँ के निवासी हंस, पतंग, ऊर्ध्वायन और सत्यांग कहलाते हैं जो 1000 वर्षों तक देवताओं के समान जीवन जीते हैं। भागवत पुराण में उनकी उपासना विधि का वर्णन करते हुए कहा गया है कि वे 'स्वर्ग-द्वारं त्रय्या विद्यया भगवन्तं त्रयीमयं सूर्यम् आत्मानं यजन्ते' — अर्थात वे त्रयी विद्या (वेदों की तीन विधाएं — ऋक्, साम और यजुर्वेद) के माध्यम से भगवान के त्रयीमय सूर्य स्वरूप की आराधना करते हैं जो स्वर्ग का द्वार है। इस प्रकार प्लक्ष द्वीप में सूर्य देव की उपासना वेदोक्त त्रयी विद्या के माध्यम से होती है जो स्वर्ग का द्वार खोलने वाली मानी जाती है। इन सभी द्वीपों में रहने वाले लोग पूर्णतः स्वर्गिक जीवन व्यतीत करते हैं।
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