मंदिर दानमंदिर में स्वर्ण दान करने का क्या विधान है?
स्वर्ण दान: महादान ('हिरण्यदानं परं')। प्रकार: देवता आभूषण (मुकुट/हार), हुंडी में, स्वर्ण मूर्ति। विधि: संकल्प (नाम+गोत्र) → पुजारी/हुंडी → रसीद अवश्य। फल: सूर्यलोक, दीर्घायु, यश, पापनाश। सावधानी: शुद्ध स्वर्ण, हृदय से (दिखावा नहीं), सामर्थ्यानुसार। 80G = कर लाभ।
#स्वर्ण दान#सोना दान#हिरण्यदान