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हिरण्यगर्भ सूक्त से जुड़े सभी प्रश्न(2)

हिरण्यगर्भ सूक्त पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 2 प्रश्न उपलब्ध हैं।

हवन विधि

हिरण्यगर्भ सूक्त मंत्र का क्या अर्थ है?

हिरण्यगर्भ सूक्त का अर्थ: जो स्वप्रकाशस्वरूप, सृष्टि के पूर्व भी विद्यमान, सम्पूर्ण जगत का एकमात्र स्वामी और पृथ्वी से द्युलोक तक को धारण करने वाले हैं — उस सुखस्वरूप परमात्मा की हविष्य (प्रेम और भक्ति) से उपासना करें।

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हवन विधि

हवन में ईश्वर स्तुति के लिए कौन से मंत्र पढ़ते हैं?

ईश्वर स्तुति: ऋग्वेद और यजुर्वेद से 8 मंत्रों का विधान। प्रमुख: 1. यजुर्वेद (30.3): 'ॐ विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परा सुव...' 2. हिरण्यगर्भ सूक्त: 'हिरण्यगर्भः समवर्त्तताग्रे...' इनके सस्वर पाठ से वातावरण पूर्णतः सात्विक होता है।

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