लोकपार्वण श्राद्ध क्या होता है?पितृ पक्ष की तिथि पर किया गया श्राद्ध पार्वण श्राद्ध है।#पार्वण श्राद्ध#पितृ पक्ष#महालय
लोकसप्तमी मृत्यु तिथि का नियम क्या है?सप्तमी मृत्यु तिथि वाले पितर का श्राद्ध पितृ पक्ष की सप्तमी को होता है।#सप्तमी मृत्यु तिथि#श्राद्ध नियम#महालय
लोकसप्तमी श्राद्ध क्या है?पितृ पक्ष की सप्तमी तिथि का श्राद्ध सप्तमी श्राद्ध है।#सप्तमी श्राद्ध#पितृ पक्ष#महालय
लोकपड़वा श्राद्ध क्या होता है?पड़वा श्राद्ध प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध है।#पड़वा श्राद्ध#प्रतिपदा#महालय
लोकप्रतिपदा मृत्यु तिथि का नियम क्या है?प्रतिपदा मृत्यु तिथि वाले पितर का श्राद्ध पितृ पक्ष की प्रतिपदा को होता है।#प्रतिपदा मृत्यु तिथि#श्राद्ध नियम#महालय
लोकचौथ श्राद्ध क्या होता है?चौथ श्राद्ध पितृ पक्ष की चतुर्थी तिथि का श्राद्ध है।#चौथ श्राद्ध#चतुर्थी श्राद्ध#महालय
लोकपड़वा श्राद्ध क्या होता है?पड़वा श्राद्ध पितृ पक्ष की प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध है।#पड़वा श्राद्ध#प्रतिपदा श्राद्ध#महालय
लोकतृतीया मृत्यु तिथि का नियम क्या है?तृतीया मृत्यु तिथि वाले पितर का श्राद्ध पितृ पक्ष की तृतीया को होता है।#तृतीया मृत्यु तिथि#श्राद्ध नियम#महालय
लोकपितृ पक्ष क्या है?पितरों के श्राद्ध के लिए निर्धारित सोलह दिनों का काल पितृ पक्ष है।#पितृ पक्ष#महालय#श्राद्ध काल
लोकतीज श्राद्ध क्या होता है?तीज श्राद्ध तृतीया श्राद्ध का ही सरल लोकनाम है।#तीज श्राद्ध#तृतीया श्राद्ध#महालय
पितृ पक्षमहालय पक्ष किसे कहते हैं?महालय = पितृ पक्ष का दूसरा नाम। दोनों समानार्थी। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक 16 दिनों की अवधि। प्रथम दिन = प्रतिपदा, अंतिम दिन = सर्वपितृ अमावस्या।#महालय#पितृ पक्ष#पर्याय
पितृ पक्षपितृ पक्ष क्या है?पितृ पक्ष = पितरों को समर्पित 16 दिवसीय अवधि। भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से आश्विन कृष्ण अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक। 'महालय' भी कहते हैं। इस काल में पितर वायु रूप में दक्षिण दिशा से घर आते हैं और तर्पण-अन्न की प्रतीक्षा करते हैं।#पितृ पक्ष#महालय#श्राद्ध काल
लोकपितृ पक्ष कब आता है और इसका महत्व क्या है?भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक पितृ पक्ष होता है, जब पितृलोक पृथ्वी के निकट माना जाता है।#पितृ पक्ष#महालय#श्राद्ध
व्रत का महत्वपितृ पक्ष क्या है और यह कब शुरू होता है?यह भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन अमावस्या तक के 16 दिन होते हैं। इन दिनों में पितर (पूर्वज) अपने वंशजों से तर्पण और भोजन ग्रहण करने धरती के करीब आते हैं।#पितृ पक्ष#महालय#श्राद्ध काल